हिंदू नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हुआ कवि सम्मेलन


मयंक पांडेय मुसाफिरखाना अमेठी


भारतीय नव वर्ष की पूर्व संध्या पर श्री नव संवत्सर आयोजन समिति के पदाधिकारियों द्वारा 11वां विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें दूरदराज से आए कवियों ने अपने अपने अंदाज में लोगों को हंसाया वही आयोजन समिति के पदाधिकारी अतुल सिंह ने कहा किइसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।सिखो के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस है स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमआर्यम का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन बलराम अग्रहरि ने किया जिसमें कवियों की अहम भूमिका में कवि पुष्कर सुल्तानपुरी ने कहा “जीत जश्न का चहुं दिशि छाया, चहुं दिशि छाया जोश,गलती से घुस गई मिसाइल, घबरा गया पदोश” वही कवित्री सिद्धि मिश्रा कि कुछ पंक्ति “सर ए महफिल सजी है ए खुदा तेरी नियामत है,जो टूटे शोर न आए गजब की ये करामत है,था इत्तेफाक नजरों का नजर से यूं नजर मिलना ,मुहब्बत ही इबादत है , मुहब्बत ही कयामत है” कार्यक्रम के समापन में एबीवीपी एवं श्री नव संवत्सर आयोजन समिति के पदाधिकारी राहुल कौशल विद्यार्थी ने किया और कहा कि हिंदू नव वर्ष हमारी सनातन संस्कृति की पहचान है हमें अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए आओ हम सब मिलकर सभी को भारतीय नववर्ष की बधाई दें| कार्यक्रम में अतुल सिंह,अभिषेक तिवारी ,राहुल कौशल विद्यार्थी, विवेक द्विवेदी, कवि शिवम मौर्य, विवेक अग्रहरि, लवकुश चौरसिया, शैलेंद्र, विजय बहादुर गिरी, बबलू बरनवाल, पवन, आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे