अतिक्रमण की चपेट में दालमंडी स्थित प्राचीन हाडेश्वर महादेव मंदिर,प्रशासन मौन

कैलाश सिंह विकास रिपोर्ट आनंद कुमार वाराणसी

वाराणसी, काशी नगरी को मंदिरों की नगरी कहीं जाती है,यहां पर आज भी कई मंदिर ऐसे हैं जो हजारों साल पुरानी है।ऐसा ही एक मंदिर चौक थाना क्षेत्र के दालमंडी स्थित हडरासराय में
अति प्राचीन श्री हाडेश्वर महादेव मंदिर है। मंदिर के पुजारी सुधांशु द्विवेदी महराज जी ने बताया कि आज भी प्रतिवर्ष काशी यात्रा के दौरान दर्शनार्थी
यहां पर दर्शन करने आते हैं।
बाबा हाडेश्वर महादेव लिंग का गर्भगृह गली से एक मंजिल नीचे
है। शिव लिंग के बगल में ही एक कुंड है,जिसमें गंगा में जब बाढ़ आता है तो उस समय कुंड में गंगा का जल भर जाता है।उस जल को हम लोग सालों तक रखतें हैं परंतु उस जल कीड़ा नहीं पड़ता।
सावन महीने में दो बार बाबा का भव्य श्रृंगार होता है, रोजाना चारों समय आरती पुजन होता है। सुधांशु महाराज ने कहा कि मंदिर का परिसर बहुत बड़ा है किन्तु मुसलमानों द्वारा चारों तरफ से अतिक्रमण कर दर्जनों दुकानों का निर्माण कर कब्जा कर लिया गया है। अतिक्रमण करने वाले दबंग दुकानदारो ने कभी किराया भी नहीं दिया,यहां तक की इन दुकानो का बिजली का बिल भी मंदिर द्वारा ही दिया जाता है। चूंकि घनघोर मुस्लिम बस्ती में मंदिर होने के कारण हमे चुपचाप दबंगई झेलना पड़ता है।
इतिहासकारों के अनुसार हजारों वर्ष पूर्व किसी समय में इसी क्षेत्र में कभी शमशान हुआ करते थे,जहां पर चिंता जलाईं जाती थी।उस समय में बाबा श्री हाडेश्वर
महादेव लिंग का बड़ा महत्व था, किन्तु आज अतिक्रमण के कारण
यह मंदिर लुप्त होने के कगार पर है।