साहित्य भूषण स्व० पं० श्रीकृष्ण तिवारी की 9वी पुण्यतिथि मनाई गई

कैलाश सिंह विकास रिपोट आनंद कुमार सिंह वाराणसी


वाराणसी। उत्तर प्रदेश भोजपुरी संघ ने संस्था के प्रांतीय उपाध्यक्ष रहे ख्यात नवगीतकार, साहित्य भूषण ,उत्तर प्रदेश रत्नपं0श्री कृष्ण तिवारीकी 9वी पुण्यतिथि जैन मंदिर स्थित मैदागिन कार्यालय में श्रद्धापूर्वक उनके चित्र पर पुष्पांजलि, माल्यार्पण साथ दीपप्रज्जवलन करके मनायी गयी तथा उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को याद किया गया।
विश्व भोजपुरी संघ के महासचिव
अपूर्व नारायण तिवारी ने कहा कि
गीतों में विबों व मुहावरों के प्रयोग में सिद्धहस्त पं0श्री कृष्ण तिवारी के गीतों में लोकरंग,सौंदर्यबोध, रोमांस,यथार्थवाद,प्रकृतिक सौंदर्य व नवचेतना के स्वर मुखरित नजर आते हैं तो उनमें टूटन संत्रास,पीड़ा,अंतर्विरोध औरदुःख का भी दिग्दर्शन दिखता है।
डाक्टर जितेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि पं0 श्री कृष्ण तिवारी जी सौंदर्यबोध के कुशल चितेरे और स्वाभिमानी गीतकार थे।
लाला रामकिशुन ने कहा कि वे साहित्य काल परम्परा के ध्वजवाहक गीतकार थे।
प्रो श्रद्धानंद ने कहा कि नवविधा के सशक्त हस्ताक्षर पंडित जी समाजिक सरोकारों के रचनाकार थे।इस अवसर पर भोजपुरी साहित्य सरिता के संपादक जे,पी,द्विवेदी की पुस्तक ‘उचरत हरिनंदी के पीर ‘ का लोकार्पण विमोचन भी किया गया।
पं0 श्री कृष्ण तिवारी स्मृति काव्य गंगा में रसासिकत मनोहारी प्रस्तुतियां दी गयी, जिनके चुनिंदा बोल इस प्रकार रहे–
1-भीलों ने बांट लिए वन राजा को खबर नहीं,रानी हो गयी बदचलन राजा को खबर तक नहीं।
2-लगने लगी नीम की पत्ति मीठी,लगता है यह दौर सांपों का डंसा हुआ है।
3-जिस दिन गीत मोहब्बत के मर जायेंगे,टूट कर उसी दिन हम अंत बिखर जायेंगे।
कवियों ने काव्यपाठ करके पंडित जी को श्रद्धांजलि अर्पित किया।
कार्यक्रम के अंत में संस्था के वरिष्ठ सदस्य काशिका के लब्ध कवि रामजी नयन के निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।
कार्यक्रम का संचालन अपूर्व नारायण तिवारी एव धन्यवाद ज्ञापन सुरेश प्रसाद पांडेय जी ने
किया।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों में सर्वश्री डॉ जितेंद्र नाथ मिश्र, पं0 देवव्रत मिश्रा,प्रो श्रद्धानंद, डॉ अपूर्व नारायण तिवारी, राजेंद्र गुप्ता,जे,पी, द्विवेदी, विजय चन्द्र त्रिपाठी, सुरेश प्रसाद पांडेय,लाला रामकिसुन गुप्ता, शिवशंकर सिंह,
डॉ दिनेश सिंह, डॉ पवन शास्त्री, शंभू नाथ पांडेय आदि प्रमुख लोग थे।