काशी में कई दौर की उद्योगपतियों की मीटिंग हुई
लेकिन एक भी स्तरीय कारखाना या उद्योग नहीं लगा आखिर क्यों? शशिप्रताप सिंह (प्रदेश प्रवक्ता- सुभासपा)

कैलाश सिंह विकास वाराणसी

वाराणसी में आईआईए की ओर से आयोजित उद्यमी महासम्मेलन में पूर्वांचल के औद्योगिक विकास को उड़ान देने के लिए रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में  प्रदेश भर से 600 से अधिक उद्यमी जुटें कार्यक्रम में औद्योगिक विकास और निवेशकों की रफ्तार बढ़ाने समेत अन्य औद्योगिक समस्याओं पर मंथन किया गया.उद्यमी सम्मेलन की प्राथमिकता यह है कि प्रदेश में औद्योगिक विकास की नीतियों का निर्धारण करने वाले मंत्रीगण व इन नीतियों के क्रियान्वयन हेतु जिम्मेदार अधिकारी कार्यक्रम के दौरान मंच पर एक साथ उपस्थित होकर पूर्वांचल में औद्योगिक विकास पर चिंतन व मंथन कर इसे निर्णायक स्वरूप देने का प्रयास करेंगे।
इसी उद्यमी महासम्मेलन के संदर्भ में सुभासपा के प्रदेश प्रवक्ता शशी प्रताप सिंह ने बताया कि ‘आईआईए के द्वारा पूर्वांचल में उद्योग लगाने को लेकर आयोजित उद्यमी महासम्मेलन बैठक एक बकवास है ,वर्तमान की केंद्र सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में तकरीबन सैकड़ो बैठकें की, परंतु निष्कर्ष कुछ नहीं निकला, पुर्वांचल सहित काशी में औद्योगिक विकास की उड़ान के लिये 600 उद्योगपति का सम्मेलन सबसे महंगे सेंटर रुद्राक्ष में हुआ ,4 मिनिस्टर एक डिप्टी सीएम के उपस्थिति में हुए इस उद्यमी महासम्मेलन में पूर्वांचल में उद्योग लगाने को लेकर खाना पूर्ति हुई।
मैं राज्य सरकार से पूछना चाहता हूं और जनता के हित मे सवाल करता हूं 8 साल से केंद्र में सरकार है और छः साल में प्रदेश की सरकार ने क्या किया दिल्ली लखनऊ से लेकर काशी में कई दौर की उद्योगपतियों की मीटिंग हुई
लेकिन एक भी स्तरीय कारखाना या उद्योग काशी में नहीं लगा आखिर क्यों?
हालांकि उत्तर प्रदेश में एक अमूल की फैक्ट्री बनारस में लगी उसके लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद है
2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में बनने वाली सरकार के ओर से पुर्वांचल में फैक्ट्री और उद्योग का एक जाल बिछाने की बात कही थी परंतु ऐसा कुछ धरातल पर देखने को नहीं मिला ,वर्तमान सरकार ने जितना खर्च इन मीटिंगों पर किया है उतने में 2, 4 कारखाने तो खोले जा सकते थे
पर सच्चाई तो यह है कि पुर्वांचल में पहले से लगे हुए जितने कल कारखाने है उनको चलाने के बजाय, उसको बन्द किया जा रहा है पुराने कल कारखाने को मजबूत पॉवर फूल बनाने के बजाय नए सिरे से कल कारखाने लगाने के लिए मीटिंग पर मीटिंग करके आम जनता के पैसा जनता का बर्बाद किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री जी का संसदीय क्षेत्र है बनारस से सटे हुए तमाम ऐसे जिले हैं जिनके पास अपना एक कुटीर उद्योग था जो बंद हो चुके हैं और जो बचा है वह बंद के कगार पर है भदोही का कारपेट, बनारस की साड़ी, मऊ की साड़ी,जो विदेशों में जाया करती थी इसको ही बढ़ावा देने के बजाय उद्योगपतियों का उद्योग यहां लाने की प्रक्रिया जो चल रही है वह शुद्ध रूप से गरीबों के जमीन को छीन कर और उस पर सरकारी धन बैंक से मोटी रकम की लोन लेकर करखाने का शिलान्यास कर और उसको एन पी ए कराकर पैसा लूटने की साजिश समझ में आ रही है पूर्वांचल की जनता यह बार-बार सवाल कर रही है कि कब आएंगे वह दिन जब पूर्वांचल के लोगो को महाराष्ट्र गुजरात पंजाब बंगाल हरियाणा दिल्ली में जाकर दर-दर की ठोकरें न खाना पड़े पुर्वांचल की जनता अपने प्रदेश में रोजगार ढूंढ रही हैं