भारत में करोड़ों कि ज़मीन पर पाकिस्तानियों का मालिकाना हक

रिपोर्ट:अरविन्द शर्मा कानपुर देहात

सरहदों के बंटवारे होने के बाद शत्रु मुल्क के नाम से जाना जाने वाला पाकिस्तान का जब भी ज़िक्र आता है तब तब भारत में सियासत गरमा जाती है लेकिन जब ज़िक्र मात्र से ही हंगामा खड़ा हो जाता है अगर ऐसे में भारत में करोड़ों की जमीन के मालिकाना हक अगर पाकिस्तान में रह रहे नागरिकों के नाम दाखिल हो तो चौकना लाजमी है ।

गौर से देखिए इस ज़मीन को जहां तलक नजर जा थी है वहां तक की ज़मीन भारतीय नागरिक की नहीं बल्कि पाकिस्तान में रह रहे लोगों के नाम दाखिल है और ये हम नहीं कह रहे है बल्कि सरकारी अभिलेख बोल रहे है अब जरा गौर से देखिए इन सरकारी दस्तावेजों को इनमें दर्ज भूस्वामी का नाम और निवास स्थान के कॉलम को इसमें भारत कि जगह पाकिस्तान का नाम दर्ज है ये दस्तावेज पाकिस्तान के नहीं बल्कि यूपी के कानपुर देहात जिले के कुछ अलग अलग भूमि गाटा संख्या के अभिलेख है हैरत की बात ये नहीं है कि ये लोग पाकिस्तान में रहने वाले है खास बात ये है कि अरसा पहले मुल्क छोड़ चुके यह लोग आज भी यहां करोड़ों कि ज़मीन के मालिक बने बैठे है ताजा रैवन्यू रिकॉर्ड के अनुसार मुल्क के नाम के स्थान पर पाकिस्तान का नाम दर्ज है, दरअसल कानपुर देहात के अकबरपुर तहसील के अन्तर्गत आने वाला बारा गांव इस वक़्त सुर्खियों में है आपको बताते चले की सरहदों का बंटवारा होने के बाद ही यहां के रहने वाले लोग पाकिस्तान में जा बसे बंटवारे के बाद उनका यहां आना जाना भी नहीं हुआ संभव है कि सभी लोग अब जीवित भी ना हो लेकिन उनकी जमीन ए लावारिस पड़ी है या फिर अन्य लोगों ने उन जमीनों पर कब्जा कर लिया है।

दरअसल सरकारी अभिलेखों में दर्ज मुल्क के नाम पर भारत के सरकारी दस्तावेजों में कानपुर देहात की कुछ जमीनों के खतौनी में दाखिल भू स्वामियों के निवास स्थान के कॉलम में शत्रु देश पाकिस्तान का नाम अंकित है जिसने सरकारी महकमे और उनकी कार्य प्रणालियों पर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं लंबे अरसे से दर्ज भारत की जमीनों पर गैर मुल्क का नाम प्रशासनिक अधिकारियों की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है अगर हम नियम की बात करें तो हर 6 वर्ष में भूमि अभिलेख के दस्तावेजों की छानबीन की जाती है और उन अभिलेखों को दर्ज त्रुटियों को सही भी किया जाता है साथ ही साथ उन सभी दस्तावेजों को तहसील स्तर पर नवीनीकरण भी किया जाता है लेकिन अरसे से कानपुर देहात की कुछ जमीनों में दर्ज गैर मुल्क पाकिस्तान का नाम अभी तक बदस्तूर अंकित है सवाल यह खड़ा होता है कि जब हर 6 साल में दस्तावेजों में नवीनीकरण की प्रक्रिया करी जाती है तो फिर लंबे अरसे से दर्ज पाकिस्तान का नाम अभी तक जमीनों की कुछ खतौनी ओं में क्यों अंकित है इस बाबत जब हमने कानपुर देहात की जिलाधिकारी नेहा जैन से बात की तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस जनपद में चार्ज लिए कुछ दिन ही हुए हैं और उन्हें इस तरह के मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है उन्होंने इस बात को स्वीकार भी कर लिया कि इस तरह की जमीनों के कागजों में जोड़ना गैर मुल्क का अंकित है वह नियंता सही नहीं है और इस तरह की भूमियों का निरीक्षण किया जाएगा साथ ही साथ जांच पड़ताल कर इन जमीनों की जानकारी कर शासन स्तर पर अवगत भी कराया जाएगा जिला अधिकारी ने बताया कि कुछ भूमिया शत्रु संपत्ति में भी दाखिल होंगी जिस का अधिग्रहण उनके द्वारा किया जाएगा। वही जब हमने मौके पर पहुंचकर जमीन का मुआयना अकबरपुर तहसील के लेखपाल और 12 गांव के प्रधान के साथ किया तो प्रधान हमको बताया कि इस तरह की जो कमियां हैं जो गलतियां हैं वह सही नहीं है और इसके लिए वह अधिकारियों को ही जिम्मेदार मान रहे हैं।