चकबंदी विभाग की गलतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं किसान

महेंद्र चौधरी झगहा गोरखपुर

चक सुधार में व्यय करना पड़ सकता है 9-10 हजार रुपए

गोरखपुर जनपद के तहसील चौरी चौरा ग्रामसभा झगहा में चकबंदी विभाग द्वारा चकों के पैमाइश के दौरान किसानों की जमीन जब कानूनगो लेखपाल के द्वारा नाम कर दिया जाने लगा तो फिर एक नई समस्या उत्पन्न हुई और जबरदस्त गड़बड़ी सामने आई। जो जमीन पानी में डूब जाता है मात्र एक ही फसल बोई जाती है उस जमीन के मालिकीयत 80 पैसा लगाया गया है और जिस जमीन पर दोनों फसल उगाई जाती है उची जमीन है उसकी भी मालियत 80 पैसे है l

पैमाइश के दौरान किसान की ऊंची जमीन जब नीचे नाप कर दिए जाने लगा तो किसानों और चकबंदी विभाग की टीम से तकरार हो गई l आखिरकार किसानों ने जरीब खींचना बंद कर दिया। किसानों का कहना है कि जब हमारे साथ न्याय होगा तभी पैमाइश होगी नहीं तो हम पानी वाली जमीन लेकर क्या करेंगे। मौके की नजाकत समझते हुए चकबंदी विभाग की टीम को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। बताया गया आगे की पैमाइश कार्य अवरुद्ध हो गई हैं l

राजकुमार सुभाष संजय पुत्र रामाधार चक संख्या 585 टोटल 418 एयर का चक है इस किसान के साथ चकबंदी विभाग इतना बड़ा जुर्म किया है की इस किसान की जमीन ऊपरी जमीन है जो दोनों फ़सल उगाई जाती है किन्तु चकबंदी विभाग द्वारा इनका चक पानी में नाप कर दिया रहा है जिसकी लम्बाई 11जरीब चौडाई 90कड़ी मात्र है। इस तरह की अन्यायपूर्ण चकबंदी से किसान के खेत मे कभी ट्रक्टर नहीं चल पाएगा। इसके अलावा किसान कों अगर इस प्लाट पर खेती करनी है तो दो बैलो की जोड़ी रखनी पड़ेगी या खेत परती छोड़ना पड़ेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही चकबंदी है तो किसान बिरोध नहीं करेगा तो क्या करेगा। डर है कि अगर ज़्यदा विरोध किया गया तो अधिकारी कर्मचारी कहेगे की सरकारी काम मे बाधा डाला जा रहा है। किसानों द्वारा अफसोस जताया जा रहा है कि यह कहने वाला कोई नहीं है कि जो अधिकारी कर्मचारी इस तरह का गलत कार्य किया है उसके खिलाफ भी कार्रवाही होनी चाहिए।

दूसरे किसान घूरहु पुत्र भूयाल की बात किया जाय तो गाटा संख्या 458 जो जमीन सड़क के किनारे है उसको हटा कर पानी वाली जमीन पर कर दिया गया है जो इनकी सड़क की कीमती जमीन है l शिवपुजन पुत्र अकलू चक संख्या 940 मे 333 एयर का रकबा है इनका 270 एयर का रकबा उड़ान कर पानी वाली जमीन दिया गया है l किसानो की समस्या पर अधिकारी बिलकुल मौन धारण किये हुये है l केवल मात्र आश्वासन मिलता है कि सुधार हो जायेगा मगर सुधार के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा है । हालत यह है कि जिलाधिकारी एवम चकबंदी अधिकारी ये कह रहे है की सभी समस्या का समाधान किया जायेगा लेकिन अब तक एक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। जमीनी हकीकत यह है कि गलती चकबंदी बिभाग ने किया है जिसका दण्ड किसान भुगत रहे हैं।

चिंतनीय बात यह है कि चकबंदी अधिकारियों द्वारा कागज सुधार करने की नसीहत दी जा रही है और इस पचड़े में पड़ने पर पीड़ित किसानों को लगभग दस हजार रुपए व्यय करने पड़ेंगे।

मुख्य रूप सें चकबंदी टीम इस प्रकार है जयप्रकाश सिंह कानूनगो,अवनिस,अनिल कुमार सुधांसु, कमला,गफर पांच लेखपाल की टीम है l