शिक्षा में हाइब्रिडमोड की अनिवार्यता
(Indispensability of Hybrid Mode in Education)

लेखक- प्रोफेसर आर पी सिंह
वाणिज्य विभाग
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय

आदरणीय प्रधानमंत्री ने अभी दो दिन पूर्व शिक्षा को हाइब्रिड मोड में चलाने की बात पर बल दिया है। उनके इस बयान को गंभीरता से सही अर्थों में समझा और अपनाया जाना चाहिए, शिक्षण की उत्पादकता के लिहाज से। यह ब्लेंडेड मोड तो व्यवसायिक जगत में वरदान साबित हुआ है, उत्पादकता बढ़ी है और कार्य योगदान के घंटे भी। अब अनेक कंपनियां तो 80 प्रतिशत से अधिक कार्य कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम के रूप में लेना बेहतर समझ रही हैं। शिक्षण जगत को हर स्तर पर इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
कई बार शिक्षक बीमार होने पर भी घर से कक्षाएं लेने की स्थिति में रहता है और इससे अध्यापन कार्य समय पर पूर्ण करने में अच्छी सहायता मिलती है।बाहर रहने पर भी कभी-कभी शिक्षक अनुभव करता है कि वह अवकाश पर बाहर रहकर भी कक्षाएं लेने की स्थिति में है तो शिक्षण की कुशलता के लिहाज से यह तरीका भी स्वीकार किया जाना चाहिए।
महिला शिक्षकों के मामले में यह बातें और ज्यादा प्रासंगिक है।
विद्यार्थी की अस्वस्थता, विकलांगता व आने में असमर्थता की स्थिति में उसे कक्षा में ऑनलाइन जोड़ने का विकल्प मिलना चाहिए। कई बार देखा जा रहा है कि अनेक छात्र पोस्ट कोविड गंभीर रुग्णता के चलते भौतिक कक्षाओं में लंबे समय तक उपस्थित नहीं रह पा रहे हैं। मैंने एक शिक्षक के रूप में इसी सत्र में कम से कम 3 छात्राओं की ऐसी असमर्थता प्रत्यक्षतः देखी है।
एक दूसरा पहलू है कि अनेक बार शिक्षक अनुभव करता है कि कुछ टॉपिक ऑनलाइन शिक्षण में कुशलता से नहीं पढ़ाये जा सकते। यहां पर भौतिक या ऑनलाइन शिक्षण के विकल्प का उपयोग शिक्षक के विवेक पर छोड़ा जाना चाहिए।
ऑनलाइन शिक्षण का अपना अनुशासन होता है, यथा ऐसी कक्षाओं का संचालन भी पहले से निर्धारित समय सारणी के अनुसार ही होना चाहिए ताकि छात्रों को कम से कम कठिनाई हो। ऑनलाइन शिक्षण उपस्थिति का प्रमाण भी स्क्रीनशॉट के रूप में कुछ समय के लिए शिक्षक द्वारा रखा जाना चाहिए। शिक्षक पर अविश्वास की प्रवृत्ति कम होनी चाहिए।
समय तेजी से बदल रहा है। आसन्न चुनौतियों व आज के माहौल में सुरक्षा के लिहाज से शिक्षकों को अपने विवेक पर ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड में शिक्षण का अधिकार दिया जाना उचित हो गया है। जिस तरह से पुरानी बातें उभर रही हैं तथा ऐतिहासिक गलतियों को ठीक करने के भगीरथ प्रयास किए जा रहे हैं उसमें प्रतिक्रिया के तौर पर आम नागरिकों और खासतौर से शिक्षकों तथा छात्राओं की भौतिक कक्षाओं में आवागमन में सुरक्षा की चुनौती बड़ी है। ऐसे में छात्रों को भी कभी भौतिक रूप से तो कभी ऑनलाइन मोड में कक्षा में शामिल होने का विवेकाधिकार प्रदान किया जाना चाहिए। कक्षाएं एक ही समय में भौतिक व ऑनलाइन मोड में भी चलाई जा सकती हैं। पर, विशेषज्ञों का मानना है कि हाइब्रिड मोड में कक्षा चलाना काफी खर्चीला है (प्रति कक्ष पांच लाख रुपए)। इतना निवेश हर संस्था के लिए सम्भव नहीं। इससे काफी कम निवेश में भी उपाय है। फिलहाल शिक्षक कब आनलाइन, कब आनलाइन रहें यह उनके विवेक और विश्वास पर होना चाहिए।

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