एम्स और पिपराइच क्षेत्र के पंचायतों में हुआ शुभ मुहूर्त में होलिका दहन।
रिपोर्ट --विनोद कुमार सोनबरसा बाजार एवं जगदीशपुर गोरखपुर।
गोरखपुर/एम्स एवं पिपराइच क्षेत्र के जगदीशपुर, कैथवलिया,सोनबरसा बाजार , रामपुर बुजुर्ग,रामुडिहा, जगपुर , मलपुर,बड़हरिया,करमैना, सिहोरिया,मोहनपुर,गोपालपुर चनकापुर आदि गांवों में बहुत धूम धाम से पूजा पाठ करके सोमवार रात में होलिका दहन किया गया।फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति में अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इस अवसर पर भक्तों ने नकारात्मकता,पाप और अहंकार को दूर करने का संकल्प लिया।
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 05 बजकर 55 मिनट पर शुरू होकर 3 मार्च को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त हुई। ज्योतिषियों ने 2 मार्च को होलिका दहन करने का सुझाव दिया था, क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा था। हालांकि, कुछ स्थानों पर अभी भी होलिका दहन नहीं किया गया है।
होलिका दहन को पापों के नाश और नए जीवन के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और अहंकार जैसे नकारात्मक भावों को अग्नि में समर्पित करने का संदेश देता है। अग्नि देवता को साक्षी मानकर होलिका की परिक्रमा करना आत्मशुद्धि का संकल्प माना जाता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों ने सूखी लकड़ियाँ और उपले अग्नि में अर्पित किए, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और समृद्धि की प्रार्थना का प्रतीक है।
यह धार्मिक त्योहार सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस अवसर पर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ एकत्रित होते हैं। गाँवों और मोहल्लों में सामूहिक होलिका दहन से भाईचारे और एकता की भावना मजबूत होती है। यह पर्व हिरण्यकशिपु के अहंकार के अंत और भगवान श्रीनृसिंह द्वारा धर्म की स्थापना की कथा को भी याद दिलाता है, जो विनम्रता, करुणा और
धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।