लोकतंत्र बनाम सत्ता संघर्ष: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक टकराव पर PSS की चेतावनी
एटा। पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार के बीच जारी टकराव को लेकर प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि सत्ता के दो केंद्रों के बीच चल रहा यह अभूतपूर्व शक्ति संघर्ष न केवल राज्य, बल्कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे के लिए भी शुभ संकेत नहीं है।
प्रेस को जारी बयान में PSS ने स्पष्ट किया कि यह मामला अब न्यायालय के संज्ञान में है, इसलिए किसी भी प्रकार की टिप्पणी सीमित दायरे में ही उचित है। इसके बावजूद संगठन ने इसे राजनीतिक नैतिकता के पतन का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तरह के टकराव से लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकता है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य दिलीप सागर के मार्गदर्शन में जारी वक्तव्य में कहा गया कि मुख्यमंत्री द्वारा जांच प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप और दूसरी ओर केंद्रीय एजेंसियों की चुनावी समय में बढ़ी सक्रियता—दोनों ही स्थितियां संदेह के घेरे में हैं। राजनीति का उद्देश्य सत्ता प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेवा और नैतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।
PSS ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सार्वजनिक संसाधनों और धन की लूट किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। संगठन ने मांग की कि भ्रष्टाचार की जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और जनता के धन का उपयोग भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों पर किया जाए।
राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवनारायण प्रसाद ने कहा कि संवैधानिक एजेंसियों की स्वायत्तता बनाए रखना लोकतंत्र की आत्मा है। यदि जांच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक हथियार के रूप में किया जाएगा, तो जनता का संस्थाओं से विश्वास उठ जाएगा।
वहीं संगठन के प्रवक्ता एवं जनसंपर्क सचिव करण सिंह राजपुरोहित ने कहा कि इस राजनीतिक खींचतान में पश्चिम बंगाल की आम जनता के मुद्दे—जैसे बेरोजगारी, स्थानीय आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा—हाशिये पर चले गए हैं। उनका आरोप है कि यह पूरा विवाद आगामी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होता है।
प्राउटिस्ट सर्व समाज ने पश्चिम बंगाल की जनता से अपील की है कि वे इस राजनीतिक द्वंद्व से ऊपर उठकर ‘प्रउत’ (PROUT) के सिद्धांतों पर आधारित आर्थिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा वाले समाज के निर्माण के लिए जागरूक हों। संगठन ने माननीय न्यायालय से हस्तक्षेप कर कानून के शासन को सुदृढ़ करने की भी मांग की है।