EU-भारत मुक्त व्यापार समझौते का प्राउटिस्ट सर्व समाज ने किया स्वागत, स्वदेशी हितों की सुरक्षा पर दिया जोर
विशेष संवाददाता
दिल्ली । भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 27 जनवरी 2026 को हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) ने “युगांतरकारी” करार देते हुए इसका स्वागत किया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य दिलीप सागर ने इसे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह समझौता दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत जीडीपी और 185 करोड़ आबादी को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा।
आचार्य दिलीप सागर ने कहा कि लगभग 27 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाला यह समझौता भारत के श्रम-प्रधान उद्योगों जैसे वस्त्र, चमड़ा और फार्मा क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलेगा। साथ ही यूरोपीय संघ की वृद्ध होती आबादी के लिए भारत की स्वास्थ्य सेवाओं और आईटी सेक्टर की भूमिका और अधिक सशक्त होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ के साथ व्यापार अधिशेष की स्थिति में है और करीब 110 अरब डॉलर के कुल निर्यात (माल एवं सेवाएं) के साथ यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी आगाह किया कि समझौते पर हस्ताक्षर केवल पहला चरण है, क्योंकि इसके क्रियान्वयन के लिए 27 यूरोपीय देशों की संसदों से अनुसमर्थन आवश्यक होगा। ब्रिटेन के साथ हुए पूर्व अनुभवों को देखते हुए भारत को सतर्क रहना होगा।
प्राउटिस्ट सर्व समाज ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कृषि और कृषि उत्पादों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। संगठन का मानना है कि कृषि प्रधान देश भारत में किसानों के हितों से कोई भी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
आचार्य दिलीप सागर ने उपभोक्तावाद को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि भारत को यूरोपीय देशों के विलासितापूर्ण उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड बनने से बचाना होगा। स्वदेशी स्वावलंबन और स्थानीय विनिर्माण को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।
निष्कर्ष रूप में प्राउटिस्ट सर्व समाज ने कहा कि यह मुक्त व्यापार समझौता अमेरिकी टैरिफ नीतियों के प्रभावी प्रत्युत्तर के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अपने स्थानीय उद्योगों, किसानों और स्वदेशी हितों की रक्षा कितनी प्रभावी ढंग से करता है।