भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग पर संगोष्ठी, छात्रों में दिखा मातृभाषा के प्रति गहरा सम्मान
निज प्रतिनिधि
सिवान। भोजपुरी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 20 फरवरी 2026 को भोजपुरी पुनर्जागरण मंच एवं एचपी पब्लिक स्कूल के संयुक्त सौजन्य से एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “भोजपुरी भाषा का संवैधानिक दर्जा” रहा। विशेष बात यह रही कि संपूर्ण कार्यक्रम भोजपुरी भाषा में ही संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रविंद्र कुमार सिंह ने की। संगोष्ठी में प्रो. भृगु नाथ प्रसाद, प्रो. रघुनाथ प्रसाद, श्री शैलेश सिंह, श्री सुभाष सिंह कुशवाहा, श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव एवं श्रीमती प्रभावती देवी ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने एक स्वर में भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। विद्यार्थियों में अपनी मातृभाषा के प्रति छिपा सम्मान भाव खुलकर सामने आया। अनुराग अभिनंदन शर्मा, अनुराग कुमार, खुशी कुमारी एवं आर्यन कुमार ने अपने तर्कों के माध्यम से भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की जोरदार वकालत की। बच्चों ने कहा कि भोजपुरी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति की आत्मा है।
प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को भोजपुरी पुनर्जागरण मंच की ओर से सहभागिता प्रमाण पत्र, मेडल, भोजपुरी बाल साहित्य पुस्तक एवं वार्षिक कैलेंडर–2026 देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में अनुराग अभिनंदन शर्मा, अनुराग कुमार और आर्यन कुमार को क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि खुशी कुमारी एवं आर्यन कुमार को सहभागिता पुरस्कार मिला।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. रघुनाथ प्रसाद ने कहा कि किसी भी भाषा को जब सरकारी मान्यता मिलती है, तो उसके प्रयोग और व्यवहार में वृद्धि होती है, जिससे भाषा का निरंतर विकास संभव होता है। श्री सुभाष सिंह कुशवाहा ने भोजपुरी को हमारी मातृभाषा बताते हुए उसके सम्मान का आह्वान किया। श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव ने तथ्यात्मक ढंग से भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा देने की आवश्यकता पर अपनी बात रखी। वहीं श्रीमती प्रभावती देवी ने “जगल रही भोजपुरिया, तबे रही” सम्मान गीत प्रस्तुत कर माहौल को भावपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष श्री रविंद्र कुमार सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने अपील की कि आगामी जनगणना के दौरान भाषा के कॉलम में सभी भोजपुरिया भाई-बहन अपनी मातृभाषा के रूप में भोजपुरी ही दर्ज कराएं।